भूमि-विस्तार के वास्तु प्रभाव

यह जानकर आश्चर्य होगा कि भूमि अथवा भवन में किसी दिशा में हुए विस्तार का भी आश्चर्यजनक प्रभाव होता है I यह विस्तार भूखंड में हो अथवा भवन में, निश्चित रूप से इसका प्रभाव देखने को मिलता है I विस्तार के इस प्रभाव को समझने में वास्तु-शास्त्र के अलावे ज्योतिषीय ज्ञान भी बहुत सहायक सिद्ध […]

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दण्ड, कारावास और वास्तु-दोष

प्रायः हमने देखा है कि निर्दोष होते हुए भी किसी व्यक्ति को शासन की ओर से दण्डित किया जाता है अथवा जिस कम्पनी में वह काम करता है उस कम्पनी के डायरेक्टर का कोपभाजन बना रहता है, कभी-कभी तो किसी और की गलती के कारण सजा भी भोगनी पड़ जाती है I सरकारी कर्मचारियों को […]

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रोग और वास्तु-लक्षण

प्रायः हमलोग किसी रोग के होने पर उसके उपचार के  विभिन्न प्रयासों में जुट जाते हैं I इन प्रयासों के रूप में हम रोग के लक्षणों के आधार पर तुरंत डॉक्टर से मिलकर ब्लड टेस्ट और ट्रीटमेंट आदि शुरू कर देते हैं  I हमारी मानसिकता ऎसी हो गयी है कि एक बार रोग के लक्षण […]

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वास्तुशास्त्र की प्रासंगिकता

जहां हम रहते हैं  उस स्थान को वास कहा जाता है  जो  संस्कृत भाषा की  क्रिया वस्  से लिया गया है। इस  प्रकार वास स्थान  के अध्ययन को ही वास्तुशास्त्र कहा जाता है।  हमारे निवास  को प्रभावित करने वाली प्राकृतिक ऊर्जाओं  में भौगोलिक ऊर्जा, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा , चंद्र ऊर्जा और विभिन्न ब्रह्मांडीय ऊर्जा हैं जो खगोल में स्थित ग्रहों एवं तारों से प्राप्त होती हैं। वस्तुतः वास्तुशास्त्र का […]

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जिओपैथिक स्ट्रेस और वास्तु-दोष

क्या हमने कभी ध्यान दिया है कि किसी नए घर में जाने पर हमारे प्रतिदिन के कामों में बार-बार व्यवधान क्यों आते हैं; क्यों घर के सदस्यों की तबीयत अचानक खराब होने लगती है; रातों में नींद नहीं आती और सुबह होने पर मन थकान और आलस्य से बोझिल रहता है, जबकि घर से बाहर […]

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